आगाज़ न्यूज/रायगढ़, 27 मई 2026: सिंघल स्टील प्राइवेट लिमिटेड के प्रस्तावित ग्रीनफील्ड स्टील प्लांट की 6 जुलाई को होने वाली लोक सुनवाई से पहले ही पतरापाली, कोतरलिया और आसपास के 20 गांवों में विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है – जिले में पहले से 100 से ज्यादा वृहद उद्योग हैं, जिनके प्रदूषण से खेती-बाड़ी चौपट हो रही है और सांस लेना मुश्किल है।
जनसुनवाई से पहले प्रभावित गांव के बुद्धिजीवी, ग्रामीण और जनप्रतिनिधियों ने प्लांट प्रबंधन के साथ बैठक की। ग्रामीणों ने प्लांट लगने का जमकर विरोध किया तो वहीं एक बड़ी आपत्ति भी दर्ज की।
ग्रामीणों ने कहा – “हमें प्लांट से आपत्ति नहीं, लेकिन गारंटी कौन देगा कि आप जमीन लेने के बाद प्लांट लगाएंगे ही? JSW और वीजा पावर प्लांट की तरह जमीन खरीदकर कब्जे में लेकर प्लांट लगाना ही भूल न जाएं।”
ग्रामीणों ने आंकड़ा रखा कि सिंघल के नए प्लांट के लिए 1000 एकड़ जमीन चाहिए। जबकि पहले से वीजा स्टील ने लगभग 500 एकड़ और JSW ने 1000 एकड़ जमीन अधिग्रहण कर अपने पास बंधक बनाकर रखा है। वहां सालों से प्लांट नहीं लगा। ग्रामीणों ने प्लांट प्रबंधन और प्रशासन से गारंटी मांगी कि जमीन अधिग्रहण के बाद प्लांट लगाया जाए, सिर्फ कब्जा न किया जाए।
प्लांट न लगाने पर 2 साल बाद जमीन वापस हो, जैसा नियम है। पुनर्वास नीति का पालन हो रोजगार, मुआवजा, विस्थापन सुविधा मिले। अभी होता ये है कि जमीन अधिग्रहण के बाद कृषि भूमि प्लांट के पास बंधक हो जाती है। न खेती कर पाते हैं, न नौकरी मिलती है, न जमीन वापस होती है। सैकड़ों एकड़ जमीन मालिक के पास बंधक हो जाती है और खेती-किसानी का बुरा हाल हो जाता है।
कलेक्टर और शासन को देंगे आवेदन
सार्थक बैठक के बाद ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि वे कलेक्टर और राज्य सरकार को इस संबंध में आवेदन देंगे। मांग है कि जनसुनवाई से पहले लिखित गारंटी दी जाए कि अधिग्रहण के बाद प्लांट लगेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा। पतरापाली क्षेत्र के लोगों का कहना है कि रायगढ़ में पहले से 100 से ज्यादा बड़े उद्योग हैं। स्पंज आयरन, पावर प्लांट, स्टील प्लांट के प्रदूषण से भूजल काला हो गया है, फसल जल रही है, सांस की बीमारी बढ़ गई है। “एक और प्लांट मंजूर, लेकिन पहले पुराने प्लांटों का हिसाब कौन देगा?


