धरमजयगढ़। कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KPCL) की प्रस्तावित कोयला खदान को लेकर धरमजयगढ़ क्षेत्र में विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि होने के कारण सैकड़ों की संख्या में किसान, आदिवासी और ग्रामीण एसडीएम कार्यालय पहुंचे और परियोजना के खिलाफ अपनी आपत्तियां दर्ज कराने की कोशिश की। बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी ने यह स्पष्ट कर दिया कि खदान परियोजना को लेकर क्षेत्र में व्यापक असंतोष और चिंता व्याप्त है।आपत्ति दर्ज कराने पहुंचे ग्रामीणों के बीच उस समय स्थिति चर्चा का विषय बन गई जब एसडीएम प्रवीण भगत ने कहा कि संबंधित सभा या कार्यक्रम के लिए अब तक कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी गई है। ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने पूर्व में आवेदन देकर पावती प्राप्त की थी, लेकिन एसडीएम का कहना था कि संबंधित विभाग से उन्हें अब तक कोई स्पष्ट जवाब प्राप्त नहीं हुआ है कि अनुमति दी जाए या नहीं।
एसडीएम के इस बयान के बाद क्षेत्र में कई सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि ग्रामीण केवल अपनी आपत्तियां और ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, तो अनुमति को लेकर इतनी अनिश्चितता क्यों रही? क्या प्रशासन को पहले से इस जनभावना की जानकारी नहीं थी? इन सवालों को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है।
क्या आपत्ति दर्ज कराने के लिए अनुमति अनिवार्य है?
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी परियोजना के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराना और प्रशासन को ज्ञापन सौंपना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। ऐसे में यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या केवल आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए भी विशेष अनुमति आवश्यक है, या फिर यह मामला केवल बड़ी भीड़ के एकत्र होने और कानून-व्यवस्था से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित है।
कार्रवाई की चर्चा से बढ़ी बेचैनी
क्षेत्र में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि एसडीएम द्वारा कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसके बावजूद ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि लोग शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आपत्ति दर्ज कराने और ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे, तो उनके खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई उचित नहीं होगी। वहीं प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने को अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी बता रहा है।
खदान परियोजना को लेकर बढ़ रही आशंकाएं
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रस्तावित कोयला खदान से कृषि भूमि, वन क्षेत्र, जल स्रोत और स्थानीय लोगों की आजीविका पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। लोगों का कहना है कि इतनी बड़ी परियोजना के बावजूद प्रभावित गांवों में पर्याप्त जनजागरूकता और स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, जिससे लोगों में असमंजस और नाराजगी बढ़ती जा रही है।
धरमजयगढ़ में गरमाया माहौल
सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी और प्रशासन के साथ हुई चर्चा ने यह संकेत दे दिया है कि कर्नाटक पावर की प्रस्तावित कोयला खदान का मुद्दा अब केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनभावनाओं से जुड़ा बड़ा विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज हो सकता है, जिस पर प्रशासन, कंपनी और शासन—तीनों की नजर बनी हुई है।

