रायगढ़ डिग्री कॉलेज-महापल्ली फोरलेन में बड़ा घोटाला। ग्राम पंडरीपानी की 2.8490 हेक्टेयर कोटवारी जमीन रायगढ़ एजुकेशन सोसायटी के नाम दर्ज। राजस्व विभाग फर्जी मुआवजा प्रकरण बनाने में जुटा। दस्तावेज सामने आए।
आगाज़ न्यूज/ रायगढ़, 26 मई 2026: डिग्री कॉलेज से महापल्ली फोरलेन में कोटवारी जमीन घोटाले के पुख्ता दस्तावेज सामने आए हैं। ग्राम पंडरीपानी की 2.8490 हेक्टेयर जमीन, जो नियमानुसार शासकीय कोटवारी मद में दर्ज होनी थी, उसे राजस्व रिकॉर्ड में ‘रायगढ़ एजुकेशन सोसायटी’ के नाम भूमिस्वामी दर्ज कर दिया गया है। अब इसी आधार पर फोरलेन मुआवजा प्रकरण तैयार किया जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार भू-अभिलेख की B-1 प्रति के अनुसार ग्राम पंडरीपानी, हल्का नं. 00038 में खसरा नं. 115, रकबा 2.8490 हेक्टेयर जमीन पर रायगढ़ एजुकेशन सोसायटी रायगढ़ कृषि भूमि दर्ज है।
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 183 के तहत कोटवारी जमीन शासकीय होती है। कोटवार की मृत्यु के बाद यह शासन में वापस आ जाती है। इसे किसी सोसायटी या निजी संस्था के नाम नहीं चढ़ाया जा सकता। आरोप है कि रायगढ़ राजस्व विभाग ने मिलीभगत कर कोटवारी जमीन को सीधे रायगढ़ एजुकेशन सोसायटी के नाम भूमिस्वामी दर्ज कर दिया। अब फोरलेन की जद में यही जमीन आने पर सोसायटी के नाम से लाखों का मुआवजा प्रकरण तैयार हो रहा है, जबकि यह राशि शासन को मिलनी चाहिए थी।
पंडरीपानी के ग्रामीणों का कहना है कि यहां के कोटवार की मृत्यु 10 साल पहले हो चुकी है। तब से रायगढ़ एजुकेशन सोसायटी का कब्जा है। पटवारी-RI ने रिकॉर्ड दुरुस्त करने की जगह सोसायटी के नाम एंट्री कर दी। अब मुआवजा देखकर फाइल दौड़ाई जा रही है।
डिग्री कॉलेज से महापल्ली फोरलेन 12 किमी का NHAI प्रोजेक्ट है। कुल भूमि अधिग्रहण 45 हेक्टेयर और मुआवजा राशि 80 करोड़ से अधिक है। अधिग्रहण प्रक्रिया 2025 से चल रही है। यहां बता दे की रायगढ़ राजस्व विभाग द्वारा इस फोरलेन मार्ग पर अवैध तरीके से मुआवजा प्रकरण बनाकर शासन को करोड़ों का चूना लगाने की तैयारी की गई है। अगर इस मामले की गंभीरता से जांच की जाए तो और बड़े खुलासे सामने आयेंगे।
अधिकारियों ने मातहतों की नहीं सुनी
बताया जा रहा है कि कई पटवारियों ने रायगढ़ एजुकेशन सोसाइटी के नाम से दर्ज कोटवारी जमीन का नाम हटाकर शासन के मद में नामांतरण करने की लिखित बात कही थी। लेकिन अधिकारियों ने मिलीभगत के कारण अब तक कोटवारी जमीन को शासन के पक्ष में नामान्तरीत नहीं किया। जिसके कारण अब फोरलेन मुआवजा में रायगढ़ एजुकेशन सोसाइटी को अनैतिक लाभ दिए जाने की प्रबल संभावना है।
पटवारी का यह है कहना
इस संबंध में क्षेत्र के पटवारी उपेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि यह सेवा भूमि है जो पहले से ही रायगढ़ एजुकेशन सोसाइटी के नाम पर दर्ज चली आ रही है हमने आला अधिकारियों को अपने प्रपत्र में सेवा भूमि होना उल्लिखित कर दिया है मुआवजा प्रकरण की जानकारी मुझे नहीं है।




