आगाज़ न्यूज/रायगढ़। 27 मई 2026: सैकड़ों उद्योगों से कराहते रायगढ़ जिले के आखिरी कृषि प्रधान ब्लॉक पुसौर पर भी अब औद्योगिक ग्रहण लगने जा रहा है। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा जारी सार्वजनिक सूचना के मुताबिक मेसर्स रुंगटा संस प्राइवेट लिमिटेड अपने मौजूदा फेरो अलॉय प्लांट को इंटीग्रेटेड स्टील प्लांट में बदलने जा रही है। इसके लिए *2 जुलाई 2026, गुरुवार सुबह 11 बजे* शहीद नंद कुमार पटेल विश्वविद्यालय के समीप, ग्राम-गढ़उमरिया में लोकसुनवाई रखी गई है।
यहां बता दें कि पुसौर क्षेत्र के गढ़उमरिया, दर्शिमुड़ा, केसला, डुमरपाली, आमापाली, नवापाली, मिड़मिड़ा, जकेला, झलमला, बिंजकोट, औरदा के हजारों किसान टमाटर, मिर्च, बैंगन, धान उगाते हैं। स्टील प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश, सल्फर डाइऑक्साइड और हैवी मेटल सीधे फसल चौपट करते हैं। तमनार-घरघोड़ा में ये मंजर दिख चुका है। 50 MW पावर प्लांट और स्टील यूनिट के लिए रोज लाखों लीटर पानी चाहिए। भूजल पहले ही 800 फीट नीचे है। केलो नदी पर दबाव बढ़ेगा। पुसौर क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि “तमनार, घरघोड़ा, खरसिया बर्बाद हो गए। अब पुसौर की बारी है। रुंगटा का प्लांट लगा तो खेती तो गई, सांस लेना भी मुश्किल होगा। ये विकास नहीं, विनाश है।”
CPCB की रिपोर्ट में रायगढ़ देश के 131 सबसे प्रदूषित शहरों में है। PM10 लेवल 3 गुना ज्यादा। जिले में 52 बड़े और 300 से ज्यादा छोटे उद्योग पहले से हैं। अब पुसौर के बाद एक भी ब्लॉक ऐसा नहीं बचेगा जहां उद्योग न हो।
कितना बड़ा है विस्तार
पर्यावरण मंडल की सूचना के अनुसार ग्राम-गढ़उमरिया एवं दर्शिमुड़ा, तहसील-पुसौर स्थित प्लांट में ये बड़ा बदलाव प्रस्तावित है:
फेरो अलॉय क्षमता : 30,000 TPA से बढ़ाकर 42,900 TPA
नई यूनिट: 0.2415 MTPA DRI, 0.224 MTPA SMS with Caster, 0.2 MTPA रोलिंग मिल
पावर प्लांट: 50 MW का कैप्टिव पावर प्लांट – 20 MW WHRB + 30 MW AFBC/CFBC
अन्य यूनिट: 200 TPD सिंटर प्लांट, 5000 Nmx/Hr प्रोड्यूसर गैस प्लांट, फ्लाई ऐश ब्रिक प्लांट
रकबा विस्तार: 2.513 हेक्टेयर से बढ़कर 11.029 हेक्टेयर – यानी 4 गुना से ज्यादा जमीन
प्रभावित खसरे: 8, 49, 51, 55, 56, 57, 58, 59, 60, 64, 385, 386 समेत 80 से ज्यादा खसरा नंबर शामिल।



