रायगढ़। एनटीपीसी लारा भूमि अधिग्रहण घोटाला फिर सुर्खियों में है, और इस बार सवाल सिर्फ घोटाले पर नहीं, बल्कि भ्रष्टाचारियों को खुला संरक्षण देने पर भी उठ रहे हैं। विधानसभा में गोंगपा विधायक तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम ने ध्यानाकर्षण सूचना के जरिए सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 500 करोड़ के इस महाघोटाले में संलिप्त अधिकारियों को दंडित करने के बजाय पुरस्कृत किया जा रहा है।
नामांतरण और बंटवारे के नियमों को ताक पर रखकर छोटे-छोटे टुकड़ों में जमीन बांटी गई।
बाहरी लोगों को 2-2 डिसमिल भूमि बेचकर करोड़ों का अवैध मुआवजा लिया गया।
जहां 500 खातेदार थे, वहां 2000 से अधिक फर्जी भूमि स्वामी बना दिए गए।
प्रति खाता 5 लाख का बोनस लूटने के लिए लोगों ने अपने ही परिवार में कई टुकड़े कर लिए।
कुछ ने तो पड़ोसियों तक को जमीन का फर्जी बंटवारा कर दिया।
असली किसानों को कम मुआवजा मिला, जबकि घोटालेबाज करोड़ों डकार गए।
दोषी अफसरों को क्लीन चिट और प्रमोशन : इस मामले में अब तक कई एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी और उप पंजीयक दोषी पाए जा चुके हैं। लेकिन जांच के नाम पर भ्रष्टाचारियों को क्लीन चिट देने का खेल जारी है।
2020 में बिलासपुर संभागायुक्त की रिपोर्ट ने सभी दोषियों को बचाने का काम किया।
सामान्य प्रशासन विभाग ने जांच को नस्तीबद्ध कर दिया, यानी अब कोई कार्रवाई नहीं होगी!
तत्कालीन कलेक्टर मुकेश बंसल की रिपोर्ट में कई अधिकारियों को दोषी पाया गया था।
कुछ समय तक निलंबन का नाटक हुआ, फिर उन्हें बहाल कर दिया गया।
अब उन्हें प्रशस्ति पत्र और प्रमोशन भी दिए जा रहे हैं!
जनता में सरकार के खिलाफ उबाल : यह घोटाला पहली बार तब सामने आया था, जब प्रदेश में भाजपा सरकार थी। और अब, जब भाजपा सरकार दोबारा सत्ता में है, तो उसी घोटाले की फाइलें दबा दी गईं, सरकार की चुप्पी और दोषियों को बचाने की साजिश से जनता में आक्रोश है। विधानसभा में विधायक तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम ने खुली चुनौती दी कि यदि भ्रष्ट अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी।