रायगढ़। समाज में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल उनके पद या उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उन अनगिनत जीवनों से होती है जिन्हें उन्होंने अपने कार्यों से संवारने का प्रयास किया। रायगढ़ के वरिष्ठ शिक्षाविद एवं समाजसेवी रामचंद्र शर्मा ऐसे ही प्रेरणादायी व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने शिक्षा, अनुशासन, सेवा और संस्कार को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाकर हजारों विद्यार्थियों और युवाओं के जीवन में नई आशा का संचार किया है।
जब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए संसाधन सीमित थे, तब वर्ष 1997 में रामचंद्र शर्मा ने आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली युवाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग की शुरुआत की। उनका उद्देश्य केवल पढ़ाना नहीं, बल्कि युवाओं के भीतर आत्मविश्वास जगाकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना था। उनके मार्गदर्शन का परिणाम यह रहा कि 200 से अधिक युवा पुलिस, बैंकिंग, न्यायिक सेवा, नायब तहसीलदार तथा विभिन्न शासकीय विभागों में चयनित होकर आज समाज और राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं।
वर्ष 2000 में उन्होंने पुलिस विभाग में अपनी सेवाओं की शुरुआत की। लगभग 16 वर्षों तक पुलिस निरीक्षक के रूप में छत्तीसगढ़ के सुदूर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों सहित विभिन्न जिलों में उन्होंने साहस, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारियाँ निभाईं। कठिन परिस्थितियों में भी आमजन के विश्वास को बनाए रखना उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता रही।
किन्तु शिक्षा के प्रति उनका लगाव कभी कम नहीं हुआ। वर्ष 2016 में उन्होंने पुलिस सेवा को अलविदा कहा और पुन: शिक्षा के क्षेत्र में लौट आए। वर्तमान में वे रायगढ़ के प्रतिष्ठित संस्कार पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर के रूप में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संस्कारयुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्यरत हैं। उनके नेतृत्व में विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है।
विद्यालय संचालन के साथ-साथ उन्होंने युवाओं के लिए नि:शुल्क प्रतियोगी परीक्षा मार्गदर्शन की परंपरा को फिर से प्रारंभ किया, जो आज भी निरंतर जारी है। उनका विश्वास है कि प्रतिभा किसी की आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती, केवल सही मार्गदर्शन और अवसर की आवश्यकता होती है। “पुलिस की वर्दी में कानून की रक्षा और शिक्षक के रूप में भविष्य का निर्माण—रामचंद्र शर्मा ने दोनों भूमिकाओं को समान निष्ठा से निभाया है। उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि पुरस्कार नहीं, बल्कि वे सैकड़ों युवा हैं जो आज अपने पैरों पर खड़े होकर समाज और राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं। यही उनकी वास्तविक पहचान और सबसे बड़ा सम्मान है।”
आज रामचंद्र शर्मा केवल एक शिक्षाविद नहीं, बल्कि विश्वास, अनुशासन और सेवा का पर्याय बन चुके हैं। उनकी सादगी, सहजता और जनहित के प्रति समर्पण ने उन्हें समाज के हर वर्ग में विशेष सम्मान दिलाया है। उनके अनेक विद्यार्थी आज विभिन्न उच्च पदों पर कार्यरत हैं और अपने गुरु को अपनी सफलता की प्रेरणा मानते हैं।

