रायगढ़। विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन रायगढ़ जिले में भाजपा के भीतर ही घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए नेताओं को जिला संगठन में ज्यादा महत्व दिए जाने से जमीनी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त आक्रोश है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि कहीं इसका नुकसान भाजपा को चुनाव में न उठाना पड़े।
जिले की 4 विधानसभा सीटों में से सिर्फ रायगढ़ सीट पर ही भाजपा का कब्जा है। धर्मजयगढ़, खरसिया और लैलूंगा में अभी कांग्रेस के विधायक हैं। ऐसे में कार्यकर्ताओं की नाराजगी पार्टी के लिए सिरदर्द बनती जा रही है।
रायगढ़ विधानसभा में विधायक ओपी चौधरी और प्रदेश की कद्दावर नेता व मंत्री के विकास कार्यों से कोई इनकार नहीं कर रहा। लेकिन जिला भाजपा संगठन में कांग्रेस से आए नेताओं को पद और तरजीह दिए जाने से पुराने भाजपाई खफा हैं। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वर्षों से पार्टी के लिए काम करने वालों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
धर्मजयगढ़, खरसिया, लैलूंगा: भाजपा की स्थिति कमजोर
धर्मजयगढ़ विधानसभा क्षेत्र से रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया आते हैं और इसी क्षेत्र से जिला भाजपा अध्यक्ष भी हैं। इसके बावजूद यहां भाजपा जीत नहीं सकी। खरसिया और लैलूंगा में भी अभी भाजपा में कोई मजबूत चेहरा सामने नहीं आ रहा। लैलूंगा में स्थिति और खराब है। यहां के भाजयुमो पदाधिकारी पहले ही पार्टी से किनारा कर चुके हैं। वहीं रायगढ़ में एल्डरमैन मनोनयन के मामले में भी जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका न दिए जाने को लेकर विरोध है। खरसिया में तो भाजपा का जीत पाना पार्टी के लिए सपना हो गया है। वहां कांग्रेस के विधायक ने भाजपा के सभी कोशिशों को नाकाम कर दिया है।
भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि कांग्रेस से आए नेताओं को जिला संगठन में जिम्मेदारी मिलने से कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है। कई कार्यकर्ता खुलकर नाराजगी जता रहे हैं। पार्टी पदाधिकारियों को डर है कि अगर नाराजगी दूर नहीं की गई तो इसका असर रायगढ़ सीट पर भी पड़ सकता है और जीत का अंतर कम हो सकता है।
चुनाव में अभी समय है, लेकिन कार्यकर्ताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ चुकी है। अब देखना होगा कि जिला और प्रदेश नेतृत्व इस असंतोष को कैसे दूर करता है। वरना 3 सीटें पहले से हाथ से गई हैं, चौथी सीट भी खतरे में पड़ सकती है।

