रायगढ़। एनटीपीसी लारा परियोजना से प्रभावित विस्थापित परिवारों के रोजगार के मुद्दे को लेकर राज्यसभा सांसद श्रीमती फूलो देवी नेताम लगातार सजग हैं। विस्थापित परिवारों के हक और रोजगार के सवाल को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हुए उन्होंने राज्यसभा में अतारांकित प्रश्न क्रमांक 2531 के माध्यम से केंद्र सरकार से सीधे जवाब मांगा है।
10 अगस्त 2026 को विद्युत मंत्रालय द्वारा दिए गए जवाब ने लारा परियोजना में रोजगार एवं पुनर्वास से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने ला दिया है।
सांसद फूलो देवी नेताम ने केंद्र सरकार से पूछा था कि क्या यह सही है कि एनटीपीसी लारा, रायगढ़ जिला की परियोजना के लिए भूमि का अधिग्रहण किया गया था और छत्तीसगढ़ की आदर्श पुनर्वास नीति के अनुपालन की शर्त पर उक्त भूमि एनटीपीसी को लीज/पट्टा पर उपलब्ध कराई गई थी।
इसके साथ ही उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि क्या भू-अर्जन से प्रभावित पात्र व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध कराने के संबंध में समझौते में स्पष्ट प्रावधान किया गया था और यदि हां, तो उसका विवरण क्या है। सबसे महत्वपूर्ण रूप से उन्होंने यह जानकारी मांगी कि अब तक कुल कितने नियमित पदों पर भर्ती हुई है और उनमें भू-अर्जन से प्रभावित परिवारों के कितने सदस्यों को नियमित नियुक्ति दी गई है।
केंद्र सरकार के जवाब से सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े–
केंद्र सरकार ने अपने जवाब में बताया कि CSIDC द्वारा 2003.69 एकड़ (810.88 हेक्टेयर) भूमि का अधिग्रहण किया गया था और इसे एनटीपीसी लारा सुपर थर्मल पावर परियोजना के लिए पट्टे पर उपलब्ध कराया गया।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि अधिग्रहण अवार्ड में निर्धारित नियमों एवं शर्तों का पालन करना आवश्यक है तथा पात्र व्यक्तियों को उनकी शैक्षिक योग्यता एवं उपयुक्तता के आधार पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
R&R के तहत एनटीपीसी लारा द्वारा 1,794 परियोजना प्रभावित परिवार (PAP)को एकमुश्त पुनर्वास सहायता तथा 67 PAP को 30 वर्षों के लिए वार्षिकी दिए जाने की जानकारी सरकार ने दी है। अर्थात कुल 1,861 परियोजना प्रभावित व्यक्तियों के संबंध में पुनर्वास उपाय किए गए हैं।
लेकिन रोजगार के मामले में सरकार के जवाब से एक महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आई है।
एनटीपीसी लारा द्वारा 79 कुशल श्रेणी के पदों को मंजूरी दी गई,जिसमें से अब तक केवल 57 नियमित नियुक्तियां की गई हैं।
अब छत्तीसगढ़,जिला प्रशासन और एनटीपीसी से जवाब मांगने का आधार और मजबूत
सांसद फूलो देवी नेताम द्वारा राज्यसभा में पूछे गए सवाल ने लारा के जल- जंगल-जमीन के विस्थापित परिवारों के रोजगार के मुद्दे को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर ला दिया है। विस्थापित परिवारों का कहना है कि भूमि चली गई, परियोजना स्थापित हो गई और प्रभावित परिवारों ने पुनर्वास की प्रक्रिया का सामना किया, लेकिन रोजगार का सवाल आज भी पूरी तरह हल नहीं हुआ है।
अब सांसद नेताम के सवाल और केंद्र सरकार के जवाब के बाद जिला प्रशासन, एनटीपीसी प्रबंधन और संबंधित सरकारों की जिम्मेदारी और अधिक स्पष्ट हो गई है।
प्रभावित परिवारों की ओर से मांग की जा रही है कि—
रोजगार के प्रावधानों का मूल भूमि अधिग्रहण अवार्ड एवं लीज शर्तों के आधार पर परीक्षण किया जाए।
पात्र परियोजना प्रभावित परिवारों की परिवारवार रोजगार स्थिति सार्वजनिक की जाए।
स्वीकृत पदों पर शेष नियुक्तियां शीघ्र की जाएं।
एनटीपीसी में भविष्य में निकलने वाले पदों में पात्र परियोजना प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता दी जाए।
जिला प्रशासन और एनटीपीसी संयुक्त रूप से विस्थापित परिवारों के रोजगार संबंधी लंबित मामलों की समीक्षा करें।
सांसद श्रीमती फूलो देवी नेताम द्वारा राज्यसभा में सवाल उठाया जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जल-जंगल – के विस्थापितों के रोजगार का मुद्दा अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुका है और प्रभावित परिवारों के अधिकारों को लेकर प्रशासन एवं एनटीपीसी से जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

