रायगढ़। बैकुंठपुर की बहुचर्चित 2.053 हेक्टेयर जमीन के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की एकल पीठ ने WP 227 क्रमांक 1277/2026 में दिनांक 01/10/2026 को आदेश देते हुए कहा है कि दो पक्षों के बीच हुआ समझौता उस व्यक्ति पर बाध्यकारी नहीं हो सकता जो उस समझौते का पक्षकार ही नहीं है।
याचिकाकर्ता मोहम्मद लतीफुर रहमान (65 वर्ष, ग्राम पुरैनी, खरसिया) ने याचिका में बताया कि ग्राम बैकुंठपुर, प.ह.नं. 47 की खसरा नं. 127/2 (1.407 हे.), 137/5/ए (0.490 हे.), 127/5, 127/11/ए, 127/11/बी (प्रत्येक 0.199 हे.) कुल 2.053 हेक्टेयर भूमि मूलतः फजुल रहमान, रामेश्वर दास सिंघानिया और काशीराम बेनीवाल की थी।
इसमें से खसरा नं. 127/2 और 137/5 की 1.48 हेक्टेयर की सह-मालिक स्व. श्रीमती सैय्यदा खान थीं, जिनका 21.03.2006 को निःसंतान निधन हो गया। याचिकाकर्ता खुद को उनका मामा का भतीजा बताते हुए वैधानिक वारिस होने का दावा करता है।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि तहसीलदार ने 30.09.2011 को सैय्यदा खान के वारिसों को पक्षकार बनाए बिना ही धनसिंह व अन्य के वारिसों के नाम पर नामांतरण कर दिया और बाद में 12.03.2012 को वह जमीन रेड कार्पेट बिल्डकॉन प्रा.लि. रायगढ़ को बेच दी गई।
इस नामांतरण को चुनौती देने पर अतिरिक्त आयुक्त ने 20.01.2023 को अपील 13/ए-6/2019-20 स्वीकार कर SDO और तहसीलदार के आदेश रद्द कर दिए थे। इसके खिलाफ रेड कार्पेट ने राजस्व बोर्ड बिलासपुर में पुनरीक्षण RN/13/R/A-6/92/2023 दायर किया। लंबित पुनरीक्षण के दौरान प्रतिवादी प्रदीप सिंघानिया और रेड कार्पेट ने आपस में समझौता कर लिया और बोर्ड ने 02.07.2026 को समझौते के आधार पर पुनरीक्षण बंद कर दिया।
याचिकाकर्ता का कहना था कि उसे न तो पुनरीक्षण में पक्षकार बनाया गया, न सुना गया, और अब उसी 02.07.2026 के आदेश को आधार बनाकर तहसीलदार रायगढ़ में नया नामांतरण केस नं. 0767012613003268/ए-6/2025-26 चलाया जा रहा है। उसने 27.08.2026 को आपत्ति और धारा 109-110 के तहत आवेदन दिया है।
राजस्व रिकॉर्ड से स्वामित्व तय नहीं होता
सुप्रीम कोर्ट के _जितेंद्र सिंह बनाम मप्र 2021_ का हवाला देते हुए कहा कि राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज होना स्वामित्व का सबूत नहीं है, यह सिर्फ वित्तीय उद्देश्य के लिए है। असली हक सिविल कोर्ट तय करेगा।
समझौता तीसरे पर बाध्यकारी नहीं
02.07.2026 का राजस्व बोर्ड का आदेश सिर्फ दो पक्षों के समझौते पर बंद हुआ है। जो व्यक्ति उस समझौते का पक्षकार ही नहीं, उस पर वह लागू नहीं हो सकता, उसके स्वतंत्र अधिकार खत्म नहीं होते।
आदेश रद्द नहीं, सुनवाई का निर्देश
अनुच्छेद 227 की सीमित शक्ति का हवाला देते हुए कोर्ट ने राजस्व बोर्ड का 02.07.2026 का आदेश रद्द करने से इनकार किया, लेकिन तहसीलदार रायगढ़ को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता की 27.08.2026 की आपत्ति पर स्वतंत्र रूप से दोनों पक्षों को सुनकर कानून के अनुसार निर्णय ले। आपत्ति को केवल इस आधार पर खारिज न करे कि राजस्व बोर्ड ने समझौता दर्ज कर लिया है।

