लैलूंगा/ केशला- तोलगे रोड़ 01 अगस्त। 20 वर्षों से जर्जर एवं बदहाल पड़ी केशला–तोलगे सड़क के निर्माण की मांग को लेकर शनिवार को लैलूँगा में एक ऐतिहासिक एवं व्यापक महाचक्का जाम आंदोलन आयोजित किया गया। केशला–तोलगे सड़क संघर्ष समिति के नेतृत्व में आयोजित इस शांतिपूर्ण जनआंदोलन में लगभग 15 ग्राम पंचायतों के हजारों ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर वर्षों से चली आ रही उपेक्षा के विरुद्ध अपनी लोकतांत्रिक आवाज़ बुलंद की।
सुबह से ही घरघोड़ा–लैलूँगा मुख्य मार्ग स्थित केशला मोड़ (हाई स्कूल के पास, कुंजारा) पर क्षेत्र के विभिन्न गांवों से लोग बड़ी संख्या में पहुँचना शुरू हो गए। कुछ ही समय में आंदोलन स्थल जनसमूह से भर गया। युवाओं, मातृशक्तियों, किसानों, व्यापारियों, मजदूरों, विद्यार्थियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं वरिष्ठ नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि सड़क निर्माण की मांग अब केवल एक स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की साझा जनभावना बन चुकी है।
20 वर्षों की पीड़ा आज जनआक्रोश बनकर सड़कों पर उतरी
आंदोलन में शामिल लोगों ने कहा कि केशला–तोलगे सड़क की जर्जर स्थिति के कारण वर्षों से आमजन को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में सड़क कीचड़ और गड्ढों में बदल जाती है, जिससे आवागमन जोखिमपूर्ण हो जाता है। विद्यार्थियों को विद्यालय और महाविद्यालय पहुँचने में परेशानी होती है, किसानों को कृषि उपज बाजार तक ले जाने में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, मरीजों को समय पर अस्पताल पहुँचने में कठिनाई होती है तथा व्यापार और दैनिक जीवन भी प्रभावित रहता है।
ग्रामीणों का कहना था कि कई वर्षों से ज्ञापन, आवेदन और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सड़क निर्माण की मांग उठाई जाती रही, लेकिन समाधान नहीं निकलने के कारण अंततः जनता को लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
गीत, भजन और लोकसंस्कृति के माध्यम से व्यक्त हुई जनता की पीड़ा
महाचक्का जाम आंदोलन की सबसे विशेष बात यह रही कि क्षेत्र के ग्रामीणों ने अपने पारंपरिक सांस्कृतिक माध्यमों से भी सड़क निर्माण की मांग को स्वर दिया। विभिन्न गांवों से पहुँची *कीर्तन मंडलियों, भजन मंडलियों तथा लोक कलाकारों* ने जनहित और विकास से जुड़े गीतों एवं भजनों की प्रस्तुति दी। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से ग्रामीणों ने अपनी वर्षों पुरानी पीड़ा, संघर्ष और उम्मीद को शांतिपूर्ण ढंग से शासन-प्रशासन तक पहुँचाने का प्रयास किया।
आंदोलन स्थल पर गूँज रहे जनगीतों और भजनों ने पूरे वातावरण को जनजागरण और एकजुटता का स्वरूप प्रदान किया। उपस्थित लोगों ने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति या दल के विरुद्ध नहीं, बल्कि सड़क निर्माण जैसे मूलभूत जनहित के मुद्दे के समर्थन में आयोजित किया गया है।
महिलाओं और युवाओं की उल्लेखनीय भागीदारी
आंदोलन में क्षेत्र की *मातृशक्तियों* ने बड़ी संख्या में भाग लेकर सड़क निर्माण की मांग को अपना समर्थन दिया। महिलाओं ने कहा कि खराब सड़क का सबसे अधिक असर बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और दैनिक जीवन पर पड़ता है। वहीं युवाओं ने इसे क्षेत्र के भविष्य और विकास से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सड़क निर्माण को समय की आवश्यकता बताया।
किसानों और व्यापारियों ने भी कहा कि बेहतर सड़क व्यवस्था से कृषि, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
अनुशासन और लोकतांत्रिक तरीके से चला आंदोलन
पूरे आंदोलन के दौरान क्षेत्रवासियों ने शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से अपनी मांग रखी। आंदोलन में शामिल लोगों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग किया और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करते हुए अपनी बात प्रशासन तक पहुँचाई। उपस्थित लोगों का कहना था कि उनका उद्देश्य केवल सड़क निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ कराना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को बेहतर सुविधाएँ मिल सकें।
PWD ने दिया लिखित आश्वासन, 19.91 करोड़ की राशि स्वीकृत
महाचक्का जाम के दौरान लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने आंदोलनकारियों को लिखित आश्वासन सौंपा। पत्र के अनुसार— उरबा – तोलगे तक लगभग 14.60 किलोमीटर सड़क की विशेष मरम्मत के लिए 19 करोड़ 91 लाख रुपये की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। वर्तमान में निविदा (टेंडर) प्रक्रिया चल रही है तथा 15 अक्टूबर 2026 से विशेष मरम्मत कार्य प्रारंभ करने का आश्वासन दिया गया है।
साथ ही, बरसात के कारण आवागमन बाधित न हो, इसके लिए विभाग द्वारा तत्काल आवश्यक पैच मरम्मत एवं आवागमन योग्य बनाने का कार्य 15 अगस्त तक कराने की बात कही गई है।
74.47 करोड़ की नई सड़क का प्रस्ताव शासन में, 2027 तक निर्माण की तैयारी
लोक निर्माण विभाग ने अपने लिखित पत्र में यह भी स्पष्ट किया कि उरबा – तमनार मार्ग (23.20 किलोमीटर) के स्थायी निर्माण को वर्ष 2026-27 के बजट में शामिल किया गया है। इस परियोजना के लिए लगभग 74 करोड़ 47 लाख रुपये का विस्तृत प्राक्कलन शासन को भेजा जा चुका है।
प्रस्ताव में निजी भूमि अर्जन एवं वन भूमि डायवर्जन भी शामिल है। विभाग का अनुमान है कि आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृतियों के बाद लगभग एक से डेढ़ वर्ष की प्रक्रिया पूर्ण होने पर 15 अक्टूबर 2027 से स्थायी सड़क निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
संघर्ष समिति ने निभाई समन्वयक की भूमिका
केशला–तोलगे सड़क संघर्ष समिति ने आंदोलन की संपूर्ण रूपरेखा तैयार करने, जनजागरण अभियान चलाने, विभिन्न गांवों से संपर्क स्थापित करने तथा कार्यक्रमों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समिति ने 19 जुलाई से 31 जुलाई तक जनसंपर्क, हस्ताक्षर अभियान, पूजा-अर्चना, जनसमर्थन अभियान, मशाल यात्रा और विभिन्न बैठकों के माध्यम से क्षेत्रवासियों को एक मंच पर संगठित किया। इसी व्यापक तैयारी का परिणाम रहा कि 01 अगस्त का महाचक्का जाम क्षेत्र के सबसे बड़े जनआंदोलनों में से एक बनकर सामने आया।

