बिलासपुर। 29 जुलाई, बुधवार।
पुलिस थाना, तमनार में लिबरा गाँव की सरपंच लक्ष्मी सिदार, उपसरपंच श्रीमती सरस्वती सिदार और सरपंच पुत्र कमलेश उर्फ कुशलेन्द्र की अग्रिम जमानत याचिका अपर सत्र न्यायालय, घरघोड़ा से खारिज होने के बाद उनकी अग्रिम जमानत याचिका हाईकोर्ट में पेश की गई थी, जिसे हाईकोर्ट द्वारा स्वीकार करते हुए उन्हें प्रत्याशित जमानत पर मुक्त कर दिया है, जिसके बाद इनकी गिरफ्तारी की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है।
सरपंच लक्ष्मी सिदार एवं अन्य पर यह आरोप लगाया गया है कि दिनांक 18/12/2025 की रात में उन्होनें अपने साथ 15-20 ग्रामीणों को लेकर जिंदल समर्थक सुभाषिनी गुप्ता के घर में घुसकर जिंदल के लिए जनसुनवाई में भूमि अधिग्रहण में समर्थन की बात को लेकर उसे अश्लील गालियाँ देते हुए जान से मारने की धमकी दिया था, जिस पर से पुलिस थाना, तमनार में उनके विरूद्ध अपराध क्रमांक-290/2025, अंतर्गत धारा 333, 296, 351 (3), 3 (5) भारतीय न्याय संहिता दर्ज किया गया, जिसमें उनकी गिरफ्तारी के लिए तमनार पुलिस सक्रिय हो गई।
तमनार पुलिस द्वारा सौदामिनी पटनायक की रिपोर्ट पर से भी सरपंच लक्ष्मीबाई एवं अन्य के विरूद्ध अपराध क्रमांक-291/2025, धारा 333, 296, 351 (3), 3 (5) भारतीय न्याय संहिता दर्ज किया गया था।
इन आरोपीगण की ओर से मिश्रा चेम्बर, रायगढ़ के एडवोकेट अशोक कुमार मिश्रा-आशीष कुमार मिश्रा द्वारा सत्र न्यायालय, घरघोड़ा में जमानत की माँग करते हुए कहा गया था कि पुलिस द्वारा आरोपित धाराओं में से धारा 333 के अलावा शेष सभी धाराएँ जमानतीय हैं एवं धारा 333 में 07 वर्ष से ज्यादा के कारावास का दण्ड प्रावधानित नहीं है, जिसके कारण “अर्नेश कुमार बनाम स्टेट ऑफ बिहार” एवं “सतेन्द्र कुमार अंटिल बनाम सी.बी.आई. एवं अन्य” में सुप्रीम कोर्ट की गाईडलाईन के अनुसार आरोपीगण की अग्रिम जमानत स्वीकार किये जाने योग्य है।
अपर सत्र न्यायाधीश, घरघोड़ा के समक्ष मिश्रा चेम्बर द्वारा सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग भी पेश की गई एवं रूलिंग के आधार पर जमानत स्वीकार करने की माँग की गई। तमनार पुलिस नें जमानत आवेदन का घोर विरोध करते हुए लिखित विरोध पेश किया, जिसके बाद अपर न्यायाधीश, घरघोड़ा नें पूरे प्रकरण की सुनवाई पश्चात् आरोपीगण के अपराध को गंभीर अपराध होना दर्शाते हुए उनका जमानत आवेदन पत्र निरस्त कर दिया।
अपर सत्र न्यायाधीश, घरघोड़ा के न्यायालय से प्रत्याशित जमानत आवेदन पत्र खारिज होने पर मिश्रा चेम्बर की ओर से चेम्बर के एसोसिएट एडवोकेट हरि अग्रवाल द्वारा हाईकोर्ट में इन आरोपियों की ओर से अग्रिम जमानत का आवेदन पत्र पेश किया गया एवं तर्क किया गया, जिसकी सुनवाई माननीय चीफ जस्टिस की बेंच में हुई एवं हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस की बेंच नें इस प्रकरण को जमानत योग्य प्रकरण होना पाते हुए सभी आरोपीगण की अग्रिम जमानत का आवेदन पत्र स्वीकार कर लिया।
हाईकोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मिश्रा चेम्बर के एडवोकेट अशोक कुमार मिश्रा-आशीष कुमार मिश्रा नें कहा कि सुप्रीम कोर्ट नें आम आदमी की स्वतंत्रता के मूल्य को संविधान की मान्यता अनुसार महत्व देते हुए ही “अर्नेश कुमार” और “सतेन्द्र कुमार अंटिल” के प्रकरण में यह गाईडलाईन दिया है कि 07 वर्ष तक के कारावास वाले प्रकरणों में विवेचना में सहयोग की स्थिति में गिरफ्तारी ही नहीं की जानी चाहिए एवं इन सभी बिन्दुओं पर विचार करते हुए हाईकोर्ट द्वारा आरोपीगण की जमानत याचिका स्वीकार की गई है एवं हाईकोर्ट के आदेश से न्याय की तथा नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा हुई है।

