रायगढ़। ईओडब्ल्यू ने सीजीएमएसी में हुए 660 करोड़ रुपए के रीएजेंट घोटाले में आईएएस भीम सिंह से गुरुवार को 10 घंटे तक पूछताछ की। खरीदी के लिए जारी किए गए टेंडर, इसके लिए अपनाई गई प्रक्रिया संबंधित कंपनियों की जानकारी ली। यह सिलसिला सुबह 10 बजे से लेकर रात 8 बजे तक चला। ईओडब्ल्यू की टीम ने रीएजेंट घोटाले के विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ की। उनका बयान दर्ज किया।
ईओडब्ल्यू सूत्रों के मुताबिक सीजीएमएससी के अफसरों ने मोक्षित कार्पोरेशन को लाभ पहुंचाने के लिए नियम कायदों को ताक पर रख दिया था। इससे पहले खैरागढ़ कलेक्टर चंद्रकांत वर्मा से पूछताछ की गई है। रीएजेंट खरीदी के दौरान चंद्रकांत सीजीएमससी के एमडी थे। सीजीएमएससी के रीएजेंट खरीदी घोटाले में ईओडब्ल्यू अब तक दो आईएएस सहित डेढ़ दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। सभी के बयान दर्ज करने के बाद गिरतारी का सिलसिला शुरू होगा।
सीजीएमएसी घोटाले का खुलासा ऑडिट रिपोर्ट में हुआ था। इसकी जांच करने के लिए ईओडब्ल्यू ने रायपुर तथा दुर्ग में छापे की कार्रवाई करते हुए मोक्षित कार्पोरेशन के एमडी शशांक चोपड़ा को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इस घोटाले को चोपड़ा ने कैसे अंजाम दिया और इसमें कौन-कौन शामिल हैं इसकी जानकारी जुटाने ईओडब्ल्यू सीजीएमएससी के तत्कालीन अफसरों से पूछताछ कर रही है।
इस संबंध में भारतीय लेखा एवं लेखापरीक्षा विभाग के प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल (ऑडिट) यशवंत कुमार ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनोज कुमार पिंगआ को पत्र लिखा था। वित्तीय वर्ष 2022-24 और 2023-24 के दस्तावेजों की जांच के दौरान ऑडिट टीम ने पाया कि बिना बजट आवंटन के 660 करोड़ रुपए की खरीदी की गई थी। कई अस्पतालों को जरूरत से ज्यादा रीएजेंट और उपकरणों की सप्लाई की गई।
डायरेक्टर हेल्थ ऋतुराज रघुवंशी ने इसके लिए सात सदस्यीय कमेटी बनाई। कमेटी ने जांच रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर बिना जरूरत के करोड़ों के रीएजेंट खरीदी के लिए सीजीएमएससी को जिमेदार ठहराया।