बिलासपुर— हाईकोर्ट ने बिल्हा स्थित जमीन मामले में याचिकाकर्ता की मांग पर सुनवाई करते हुए पक्षकार को फरमान जारी किया है। न्यायालय ने कहा कि प्रतिवादी अगली सुनवाई में जवाब पेश करे कि जमीन मालिक जिन्दा है या नहीं..। मामले में अगली सुनवाई 29 नवम्बर को होगी।
हाईकोर्ट में जमीन विवाद को लेकर फिल्मी मामले सामने आया है। बिल्हा निवासी याचिकाकर्ता मदन अग्रवाल ने वकील के जरिए कोर्ट को बताया कि वह जिन्दा है। प्रतिवादी ने गलत जानकारी पेश कर अपने पक्ष में रेवन्यू बोर्ड से निर्णय करवाया है। प्रतिवनादी ने फर्जी गवाह पेशकर उसे मृत घोषित भी किया है।
याचिकाकर्ता के वकील अमित कुमार ने हाईकोर्ट को बताया कि बिल्हा स्थित ढाई एकड़ जमीन पर मदन अग्रवाल का कब्जा है। मदन अग्रवाल ही जमीन के असली मालिक हैं। प्रतिवादी मंजू दुबे ने मदन अग्रवाल के खिलाफ तहसील में वाद प्रस्तुत कर बताया कि जिस जमीन को मदन अग्रवाल अपना बता रहे हैं। दरअसल जमीन उसकी है। इसलिए जमीन पर कब्जा दिलाया जाए। इसके बाद मामला अपीलीय कोर्ट से होकर कमिश्नरी के बाद रेवन्यू बोर्ड तक पहुंचा।
रेवन्यू बोर्ड को मंजू ने बताया कि जमीन उसकी है। मदन अग्रवाल अब इस दुनिया में नहीं है। मंजू दुबे ने बोर्ड के सामने मदन अग्रवाल के फिर्जी वारिशनों को पेश किया। मामले में मदन अग्रवाल को भी जानकारी नहीं हुई। फर्जी परिजनों की गवाही के बाद रेवन्यू कोर्ट ने विवादित ढाई एकड़ जमीन का फैसला मंजू दुबे के पक्ष में किया।
मामले की जानकारी के बाद याचिकाकर्ता न्याय पाने हाईकोर्ट की शरण में पहुंचा। मदनलाल की तरफ से वकील अमित कुमार ने बताया कि याचिकाकर्ता मदन ने अपने वकील के जरिए याचिका पेश किया। कोर्ट को मदन ने बताया कि वह जिन्दा है। जमीन भी उसकी है। हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मंजू दुबे को फरमान जारी किया है कि बताएं मदन अग्रवाल जिन्दा हैं या नहीं…। अगली सुनवाई 29 नवनम्बर को होगी। सुनवाई के दौरान सारी जानकारी पेश करें।
याचिकाकर्ता ने दिया जिन्दा होने का प्रमाण..न्यायालय का फरमान..प्रतिवादी बताए..जमीन मालिक जिन्दा है या नहीं
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