रायगढ़। उपायुक्त सहकारिता सीएम, कलेक्टर जनदर्शन समेत आयोग, मंत्री व आला अधिकारियों से हुए शिकायतों को लेकर उदासीन नजर आ रहे हैं। बार-बार शिकायत के बाद भी शिकायतकर्ताओ के आवेदन को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यहां तक की आला अधिकारियों के निर्देश का भी पालन उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं नहीं कर रहे हैं। ऐसे में अपर कलेक्टर को कारण बताओ नोटिस जारी कर लिखित में कहना पड़ गया कि (उपायुक्त की) कार्यप्रणाली से शासन प्रशासन की छवि खराब हो रही है । बावजूद इसके उपायुक्त सहकारी संस्थाएं ने शिकायतकर्ता की शिकायत को अब तक गंभीरता से नहीं लिया।
दरअसल मामला यह है कि कोड़ासिया धान मंडी सहकारी समिति में प्रबंधक त्रिलोचन बेहरा एवं उसके पुत्र के विरुद्ध भ्रष्टाचार व अनियमितता की शिकायत ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से लेकर कलेक्टर से की थी। जिसके जांच के लिए सहकारिता विभाग ने केआर देवांगन (सहकारिता विस्तार अधिकारी रायगढ़) एवं कु. हिमलेश्वरी कंवर (सहायक आयुक्त सहकारिता, रायगढ़) को जांच दल में शामिल किया था। ग्रामीणों का आरोप है की जांच टीम ने कोडासिया प्रबंधक से साठगांठ करके मामले को दबा दिया। तब से लगातार ग्रामीण इसकी शिकायत करते आ रहे हैं इस पूरे प्रकरण में डीआर की भूमिका भी संदिग्ध है। आला अधिकारियों के निर्देश के बाद भी उपायुक्त सहकारिता कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
सीएम से शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं, बाप बेटा एक ही समिति में जमे
कोडासिया धान मंडी, जिला रायगढ़ के किसानो ने मुख्यमंत्री से शिकायत कर बताया कि फसल बिक्री एवं अन्य सहकारी गतिविधियों के माध्यम से अपनी आजीविका चलाते हैं। हम सभी किसान आपके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन की किसान हितैषी नीतियों से प्रेरित होकर कृषि क्षेत्र में सुधार की अपेक्षा रखते हैं। किन्तु, वर्तमान में हम किसानी को एक गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण हमारी आर्थिक स्थिति एवं मानसिक शांति दोनी प्रभावित हो रही है।
कोडासिया धान मंडी (पंजीयन क्रमांक 833) के प्रबंधक त्रिलोचन बेहरा ने अनैतिक एवं संदिग्ध तरीके से अपने ही पदस्थ सहकारी समिति में अपने पुत्र सुशील बेहरा को लिपिक पद पर नियुक्त करने, दोनों बाप-बेटे द्वारा मिलकर समिति के पैसों का दुरुपयोग करने तथा किसानों से फर्जी तरीके से पैसे की उगाही करने के आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर रायगढ़ को लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इन अनियमितताओं में धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव, किसानों से पैसों की ठगी व घोटाले शामिल हैं, जिससे हमारी फसल का उचित मूल्य एवं समय पर भुगतान प्रभावित हो रहा है।
जांच दल में शामिल अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
कलेक्टर द्वारा इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उप पंजीयक सहकारी संस्थाएँ, रायगढ़ को निर्देश जारी किए गए कि उक्त प्रबंधक के विरुद्ध जाँच की जाए तथा 3 दिनों के अंदर जाँच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाए। इसके अनुपालन में आँच दल का गठन किया गया, जिसमें श्री के. आर. देवांगन (सहकारिता विस्तार अधिकारी रायगढ़) एवं कु. हिमलेश्वरी कंवर (सहायक आयुक्त सहकारिता, रायगढ़) को जाँच दल के सदस्य नियुक्त किया गया। इन अधिकारियों को 3 दिवस के अंदर जाँच कर जाँच प्रतिवेदन उप आयुक्त सहकारिता एवं कलेक्टर महोदय, रायगढ़ को सौंपना था। हम किसानों को विश्वास था कि शासन की इस त्वरित कार्रवाई से न्याय मिलेगा। लेकिन दुख के साथ सूचित करना चाहते हैं कि जाँच दल के इन अधिकारियों द्वारा मामले को दबाने एवं प्रबंधक को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। आदेशित होने के एक माह हो जाने के बावजूद इन जाँघ दल के अधिकारियाँ द्वारा कोई रुचि न दिखाते हुए एक भी कार्यवाही शुरू नहीं की गई है। जाँच प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है, गवाही के बयान दर्ज नहीं किए जा रहे। इससे न केवल जाँच की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लग गया है, अपितु हम किसानों में असंतोष एवं निराशा व्याप्त हो गई है। हमारी फसल का भुगतान लंबित होने से हमारी आर्थिक स्थिति दयनीय हो चुकी है, तथा ऋण चुकाने एवं पारिवारिक खर्च में भारी कठिनाई हो रही है। इसके अतिरिक्त, आने वाले धान खरीदी सत्र में शासन एवं किसानों को भारी नुकसान होने की आशंका है, जो छत्तीसगढ़ शासन की ‘किसान सम्मान नौति के विपरीत है। किसानों ने सीएम से मांग की है कि उक्त जाँच दल के अधिकारियों के. आर देवांगन एवं कु. हिमलेश्वरी कंवर के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए तथा उनकी भूमिका की भी जाँच की जाए। साथ ही प्रबंधक त्रिलोचन बेहरा एवं उनके पुत्र श्री सुशील बेहरा के विरुद्ध तत्काल निलंबन एवं पूर्ण जाँच सुनिश्चित की जाए।
इधर ग्रामीणों की शिकायत को देखते हुए अपर कलेक्टर ने उपायुक्त सहकारिता व्यास साहू को कई बार नोटिस जारी किया लेकिन डीआर को न तो शासन का डर है और न ही किसानों की समस्या से मतलब।




