रायगढ़। सेठ किरोड़ीमल शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज का नाम बदलकर ‘छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ किए जाने का विवाद अब और भी गहरा गया है। पूर्व छात्रों और रायगढ़ की जनता के आक्रोश के बाद, अब इस ऐतिहासिक संस्थान का निर्माण करने वाले ‘सेठ किरोड़ीमल चैरिटी ट्रस्ट’ ने भी इस सरकारी फरमान के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। ट्रस्ट ने 1955 के उस सरकारी अनुबंध (Agreement) का पन्ना खोल दिया है, जिसमें साफ लिखा था कि 20 लाख रुपए के इस दान से बने संस्थान का नाम सदैव ‘सेठ किरोड़ीमल’ के नाम पर ही रहेगा।
किरोड़ीमल पॉलिटेक्निक का नाम बदलने के विरोध में उतरा सेठ किरोड़ीमल चैरिटी ट्रस्ट
ट्रस्ट के सचिव राजेश भारद्वाज ने मुख्य सचिव (छ.ग. शासन) और रायगढ़ कलेक्टर के नाम सौंपा आपत्ति पत्र
ट्रस्ट के प्रतिनिधिमंडल ने कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मोहन हरि सोनी से मिलकर जताया कड़ा विरोध
ज्ञापन में 1955 के अनुबंध का खुलासा: ट्रस्ट ने खर्च किए थे 20 लाख रुपए, नाम न बदलने की थी शर्त
भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 1956 में किया था इस ऐतिहासिक भवन का उद्घाटनट्रस्ट ने सामने रखा 1955 का ‘अनुबंध’
नाम बदलने की इस कार्यवाही पर कड़ी आपत्ति जताते हुए, सेठ किरोड़ीमल चैरिटी ट्रस्ट के सचिव राजेश भारद्वाज ने राज्य के मुख्य सचिव और जिला कलेक्टर के नाम एक लिखित ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में एक बेहद चौंकाने वाला और अहम ऐतिहासिक तथ्य सामने रखा गया है। ट्रस्ट ने बताया है कि रायगढ़ में तकनीकी शिक्षा के इस संस्थान की स्थापना के लिए 08 अक्टूबर 1955 को तत्कालीन मध्यप्रदेश शासन के प्रतिनिधि एस.एन. लिमये जी के साथ एक बाकायदा अनुबंध (Contract) किया गया था। इस अनुबंध के अनुसार, संस्थान के निर्माण का संपूर्ण खर्च (तकरीबन 20,000,000/- बीस लाख रुपये) सेठ किरोड़ीमल चैरिटी ट्रस्ट द्वारा उठाया गया था।अनुबंध के बिंदु-06 का हुआ खुला उल्लंघन
ट्रस्ट ने ज्ञापन के साथ उस ऐतिहासिक अनुबंध की कॉपी भी संलग्न की है। ट्रस्ट ने प्रशासन को याद दिलाया है कि उस अनुबंध के ‘बिन्दु 06’ के अनुसार यह स्पष्ट और लिखित शर्त थी कि “उक्त संस्थान का नाम सेठ किरोड़ीमल जी के नाम पर सदैव रहेगा”। ऐसे में बिना ट्रस्ट को भरोसे में लिए और बिना किसी जनचर्चा के रातों-रात बोर्ड बदलकर ‘छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ कर देना, सीधे तौर पर उस समझौते का उल्लंघन है।
प्राचार्य से की मुलाकात, याद दिलाया राष्ट्रपति का शिलालेख
जिला कलेक्टर कार्यालय में मुख्य सचिव और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपने के साथ ही सेठ किरोड़ीमल ट्रस्ट सचिव राजेश भारद्वाज, अनिल चीकू, राघवेन्द्र व्यास, एन कांतिकीरण पॉलिटेक्निक कॉलेज पहुंचकर प्राचार्य डॉ. मोहन हरि सोनी से भी मुलाकात की और अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।



