रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में खरसिया विधायक उमेश पटेल ने राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता प्रस्ताव में प्रथम वक्ता के रूप में सरकार के प्रति प्रखर होकर अपनी बात रखी। विधायक पटेल ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण में कुल 106 बिंदु हैं, जिसमें शुरुआती दस बिंदु तो अन्य चीजों के लिए हैं, लेकिन 11वें से 28 वें तक खेती-किसानी, मत्स्य पालन और सिंचाई के बारे में बात कही गई है। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि इस सरकार का किसानों के प्रति जो व्यवहार है, उसके बाद भी यह सरकार राज्यपाल से किसानों के बारे में बुलवा रही है। जबकि सच्चाई यह है कि छत्तीसगढ़ का किसान पहली बार धान खरीदी जैसे गंभीर विषय हों या खाद-बीज का विषय हो, इतना प्रताड़ित हुआ है। पहली बार छत्तीसगढ़ का किसान पंजीकरण के बावजूद भी अपना धान नहीं बेच पाया है। यह भी पहली बार हुआ है कि छत्तीसगढ़ का किसान टोकन कटने के पश्चात भी अपना धान नहीं बेच पाया है। यह भी पहली बार हुआ है कि किसानों का सर्वाधिक रकबा समर्पण कराया गया है और यह भी पहली बार हुआ है कि छत्तीसगढ़ के माटीपुत्र किसान को टोकन कटवाने के लिए दर-दर भटकना पड़ा है; और यह सरकार राज्यपाल के अभिभाषण में किसानों के हित की बात कर रही है। विधायक पटेल ने कहा कि जिस तरह से डीएपी और यूरिया के लिए किसानों को परेशान होना पड़ा, यह यहाँ उपस्थित सभी विधायक जान रहे हैं। 300 रुपये के यूरिया को किसान को 1200 से अधिक कीमत में और डीएपी को 3000 से अधिक में खरीदना पड़ा। सरकार कह रही है कि महतारी वंदन में सालाना 12 हजार रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि सालाना 22 हजार से अधिक रुपये लिए जा रहे हैं – चाहे खाद-बीज में ब्लैक मार्केटिंग करके हो या बिजली बिल में बढ़ोतरी करके। इसके बावजूद सरकार राज्यपाल से किसान हित में भाषण करवा रही है। विधायक पटेल ने आगे कहा कि भाजपा सरकार ने धान खरीदी में किसानों के लिए इतनी समस्या केवल और केवल जानबूझकर पैदा की है ताकि धान खरीदी कम हो। इस बार धान का उत्पादन बहुत अधिक हुआ, जिससे किसान खुश थे, परन्तु सरकार ने खरीदी में तरह-तरह की परेशानियां खड़ी कर किसानों को रुला दिया।



