रायगढ़। जिले के एक महत्वपूर्ण प्रकरण में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने टाटा ए0आई0जी0 जनरल इंशोरेंस कंपनी के विरुद्ध पन्द्रह लाख बीस हजार रूपये का एवार्ड पारित करते हुए यह रकम 45 दिवस के भीतर शिकायतकर्ता शारदा देवी को देने का आदेश दिया है।
शिकायतकर्ता शारदा देवी की ओर से जिला आयोग में मिश्रा चेम्बर रायगढ़ के सीनियर एडवोकेट अशोक कुमार-आशीष कुमार मिश्रा द्वारा यह प्रकरण पेश किया गया था कि दिनांक 03/10/2023 को शाम लगभग 7ः30 बजे शिकायतकर्ता के पति अपनी बीमित वाहन टोयोटा ग्लेन्जा कार नंबर सी.जी. 13 ए. डब्लू. 2527 से चक्रपथ से होकर गन्तव्य की ओर जा रहे थे तभी अचानक केलो नदी का जल प्रवाह स्तर बढ़ गया एवं वाहन सहित पानी में डूबने से उनकी मृत्यु हो गई तथा वाहन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया ।
शिकायतकर्ता के अनुसार उपरोक्त वाहन का बीमा टाटा ए0आई0जी0 जनरल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा किया गया था, जिसमें दुर्घटना होने पर वाहन स्वामी के लिये पन्द्रह लाख रूपये और वाहन डेमेंज के लिये डेमेंज रकम के भुगतान की जोखिम आच्छादित थी तथा उक्त दुर्घटना बीमा अवधि के दौरान हुई थी परंतु बीमा क्लेम किये जाने पर टाटा ए.आई.जी. जनरल इंशोरेंस कंपनी ने उक्त दुर्घटना हेतु शिकायतकर्ता के पति को जिम्मेदार ठहराते हुये समूचा बीमा क्लेम अस्वीकार कर दिया जबकि शिकायतकर्ता को संपूर्ण बीमा राशि का भुगतान किया जाना चाहिये था। इस प्रकरण में शिकायतकर्ता की ओर से मिश्रा चेम्बर रायगढ़ के एसोसिएट श्री विजय शर्मा अधिवक्ता द्वारा आयोग के समक्ष मौखिक तर्क प्रस्तुत किया गया एवं सीनियर एडवोकेट अशोक कुमार मिश्रा द्वारा लिखित तर्क प्रस्तुत किया गया । बीमा कंपनी द्वारा जिला आयोग के समक्ष यह तर्क प्रस्तुत किया गया था कि बीमित नटवर लाल अग्रवाल द्वारा जानबूझकर अपनी कार को पानी के अंदर उतार दिया गया, जिसके कारण पानी के तेज बहाव में नटवर लाल कार सहित बह गये एवं तदनुसार उन्होंने जानबूझकर जोखिम लेते हुये कार चलाई, जिसके कारण उनकी मृत्यु हुई इसलिये बीमा कंपनी किसी भी प्रकार की जोखिम के लिये जिम्मेदार नहीं है। दोनों पक्ष की बहस सुनने के पश्चात आयोग के अध्यक्ष माननीय छमेश्वर लाल पटेल एवं सदस्य राजश्री अग्रवाल व राजेन्द्र कुमार पाण्डेय ने सर्वसम्मति से बीमा कंपनी के तर्क एवं बचाव को मानने से इंकार करते हुये शिकायतकर्ता का आवेदन पत्र स्वीकार करते हुये शिकायतकर्ता के पक्ष में एवार्ड दिलाने का आदेश पारित किया। जिला आयोग ने अपने आदेश में यह विशेष उल्लेख किया है कि बीमा कंपनी ने न तो अन्वेषण रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले अन्वेषक का शपथपत्र प्रस्तुत किया है, न ही अन्वेषक द्वारा जिन गवाहों का कथन लिया गया है, उन गवाहों का कथन ही आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया है एवं ऐसी कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया है कि घटना दिनांक को केलो नदी में अधिक जलप्रवाह था एवं मृतक को अपने गंतव्य पर जाने के लिये अन्य रास्ता उपलब्ध था या प्रशासन द्वारा किसी प्रकार का बेरिकेट अथवा रोक लगाई गई थी, ऐसी स्थिति में मृतक की स्वयं की लापरवाही से उसकी मृत्यु होने का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेशित किया कि वह शिकायत कर्ता को पन्द्रह लाख रूपये बीमा क्लेम का भुगतान करे साथ ही मानसिक एवं आर्थिक क्षति के मद में पन्द्रह हजार रूपये एवं वाद व्यय के मद में पांच हजार रूपये अर्थात् कुल पन्द्रह लाख बीस हजार रूपये का भुगतान 45 दिवस के भीतर करे अन्यथा उक्त राशि का 9 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज भी देय होगा । आयोग ने यह भी आदेश दिया है कि डेमेज वाहन की मरम्मत करा कर शिकायतकर्ता द्वारा बिल व्हाउचर पेश करने पर 45 दिन के भीतर बीमा कंपनी डेमेज क्लेम का निराकरण करे एवं निराकरण से असंतुष्ट होने पर शिकायतकर्ता इस बावत पृथक से परिवाद कर सकती है ।
जिला आयोग के इस आदेश पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये मिश्रा चेम्बर रायगढ़ के सीनियर अधिवक्ता अशोक कुमार मिश्रा ने कहा कि कुछ बीमा कंपनियां ऐसी हैं, जो तरह-तरह के प्रलोभन देकर अपने ग्राहकों से प्रीमियम और पाॅलिसी की मोटी रकम वसूल कर ग्राहक का बीमा तो कर देती हंै लेकिन जोखिम की जिम्मेदारी निभाने का अवसर आते ही कोई न कोई बहाना बनाकर ग्राहक को अंगूठा दिखाते हुये उसका पूरा सपना तोड़ देती हंै, तब बीमा कराने वाले को महसूस होता है कि वह बीमा कंपनी की सुनियोजित ठगी का शिकार हो गया है । श्री मिश्रा अधिवक्ता ने बीमा कराने वालों को बीमा कराने के पहले ऐसी ठग कंपनियों की पहचान कर लेने और ऐसी ठग कंपनियों से दूर रहने की सलाह देते हुये जिला आयोग के इस फैसले को ऐसी बीमा कंपनियों के लिये एक शिक्षात्मक सबक होना बताया है । शिकायतकर्ता श्रीमती शारदा देवी अग्रवाल ने जिला आयोग के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुये इस फैसले को सत्य एवं न्याय की जीत करार दिया है एवं कहा है कि उसे पूर्ण विश्वास था कि जिला आयोग में शिकायत प्रस्तुत करने पर उसे निश्चित रूप से न्याय मिलेगा तथा इस आदेश ने उसके विश्वास को पुष्ट किया है।



