आगाज़ न्यूज/रायगढ़। जिला पंचायत में सहकारिता एवं उद्योग समिति सभापति गोपाल अग्रवाल ने पीडब्ल्यूडी ईई को पत्र लिखकर सवाल किया है कि राज्य शासन द्वारा बजट में “लाखा-गेरवानी-चिराईपानी-पाली-देलारी मार्ग” के निर्माण की घोषणा को लगभग 02 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। यह मार्ग क्षेत्र की औद्योगिक कनेक्टिविटी, भारी वाहनों की निर्बाध आवाजाही तथा ग्रामीण जनता के दैनिक आवागमन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
यह अत्यंत खेद का विषय है कि बजट घोषणा के दो वर्ष पश्चात भी इस मार्ग के निर्माण की वास्तविक प्रगति अपेक्षित स्तर पर नहीं पाई गई है, जिसके कारण क्षेत्र की जनता में निराशा एवं असंतोष व्याप्त है।
अतः जिला पंचायत की सहकारिता एवं उद्योग समिति, इस विषय पर आपसे निम्नलिखित बिंदुओं पर बिंदुवार, तथ्यात्मक एवं दस्तावेजी जानकारी अपेक्षित करती है-
1 घोषणा उपरांत की गई कार्यवाही का विवरण : विगत 02 वर्षों में इस मार्ग के निर्माण हेतु विभाग द्वारा किए गए समस्त चरणों (जैसे- सर्वेक्षण, डीपीआर निर्माण, तकनीकी स्वीकृति, प्रशासनिक स्वीकृति आदि) का तिथि-वार विवरण प्रस्तुत करें।
2 निर्माण में विलंब के स्पष्ट कारण : यदि कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है अथवा प्रगति अत्यंत धीमी है, तो विलंब के लिए उत्तरदायी कारणों (जैसे- भू-अर्जन, वित्तीय स्वीकृति, वन विभाग की अनुमति, निविदा संबंधी कारण अथवा अन्य प्रशासनिक कारण) का स्पष्ट उल्लेख करें।
3 वित्तीय स्थिति एवं बजटीय आबंटन : इस परियोजना हेतु अब तक स्वीकृत कुल राशि, जारी की गई राशि तथा वर्तमान वित्तीय वर्ष में प्राप्त/प्रस्तावित बजटीय आबंटन का विवरण दें।
4. निविदा एवं कार्यादेश की स्थिति : क्या परियोजना की निविदा प्रक्रिया पूर्ण की जा चुकी है? यदि हाँ, तो चयनित ठेकेदार का नाम, कार्यादेश की तिथि एवं अनुबंधित पूर्णता अवधि (Completion Timeline) की प्रति संलग्न करें।
5 डिज़ाइन एवं गुणवत्ता मानक : चूंकि यह मार्ग औद्योगिक एवं भारी वाहनों के आवागमन होते है, अतः इसकी लोड क्षमता (Axle Load Design), सड़क की परतों (Pavement Composition) तथा प्रयुक्त सामग्री के तकनीकी मानकों का विवरण प्रस्तुत करें।
6 व्यक्तिगत जवाबदेही : बजट घोषणा के 02 वर्ष उपरांत भी कार्य पूर्ण न होने की स्थिति में विभागीय स्तर पर किस अधिकारी/पदाधिकारी की जवाबदेही निर्धारित की गई है, इसका स्पष्ट उल्लेख करें।
उपरोक्त समस्त जानकारी 07 दिवस के भीतर समिति के समक्ष प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। निर्धारित समयावधि में जानकारी प्राप्त न होने अथवा जानकारी अपूर्ण या अस्पष्ट पाए जाने की स्थिति में समिति द्वारा विषय को शासन स्तर पर अवगत कराते हुए आवश्यक कार्यवाही हेतु अनुशंसा किया जाना संभव होगा।


