रायगढ़। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस की कार्रवाई से रायगढ़ में हडक़ंप मच गया है। इस कार्रवाई का असर सबसे ज्यादा उन युवकों पर पड़ा है जो ईजी मनी के चक्कर में इस नेक्सस का हिस्सा बन गए। डीजीजीआई ने आवेश और अमन को हिरासत में लिया है। पूछताछ में पता चला कि आवेश इसका मास्टरमाइंड है। उसी ने फर्जी फर्म बनाए। अमन ने भी अपने स्टाफ के नाम पर फर्म बनाकर बिल बेचे। दूसरे के आधार कार्ड और पैन कार्ड पर फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों का कारोबार किया गया। केवल कागजों पर ही लेन-देन होता था। हकीकत में ये कंपनियां धरातल पर नहीं थीं। आवेश अग्रवाल ने ऐसी फर्मों के नाम पर फर्जी बिलिंग की जिससे इनपुट क्लेम हो गया। करोड़ों रुपए की टैक्स चोरी की। डीजीजीआई ने आवेश अग्रवाल और अमन सिंघानिया को रिमांड पर लिया है।
अब तक की पूछताछ में पता चला है कि आवेश अग्रवाल ही इस गिरोह का सरगना था। उसी के कहने पर शहर के कई युवाओं ने फर्जी फर्म बनाए थे। उनके एकाउंट से ट्रांजेक्शन होता था। ऐसा करके दोनों ने अकूत संपत्ति बना ली है। जमीन, पेट्रोल पंप, मकान आदि के मालिक बने ये युवा अब DGGI के लपेटे में आए हैं। प्रारंभिक आंकड़ा 90 करोड़ का है जो बढ़ सकता है। इस कार्रवाई से रायगढ़ में कई लोगों के दिल की धडक़न बढ़ी हुई है। आवेश से सीखकर अमन ने भी अपने स्टाफ के नाम पर फर्म बनाया। वर्ष 2024-25 में जे इंटरप्राइजेस नामक फर्म से 60 करोड़ की बिक्री दिखाई। ये फर्जी बिल ओडिशा के ठेकेदारों को दिए गए। उन्होंने बिल लगाकर इनपुट क्लेम कर लिया। ये फर्जी फर्म जब बंद होने लगी तो सेंट्रल जीएसटी को संदेह हुआ।
बताया जा रहा है कि अमन सिंघानिया ने अपने स्टाफ के नाम से फर्म खोली थी। उससे 60 करोड़ का लेन-देन किया गया। सेंट्रल जीएसटी ने उस स्टाफ को पकड़ा और पूछताछ की। वहां से अमन सिंघानिया का नाम सामने आया। तब डीजीजीआई ने अमन पर शिकंजा कसा। आवेश तो बोगस फर्म बनाने का मास्टरमाइंड था। वह ज्यादातर ओडिशा में ही रहता था।
जानकारी के मुताबिक डीजीजीआई ने एक से दूसरी कड़ी जोड़ते हुए आवेश को शिकंजे में लिया है। दरअसल दोनों ने ओडिशा में फर्म पंजीयन करवाकर धोखाधड़ी की। राउरकेला डीजीजीआई के कार्यक्षेत्र में आने के कारण कार्रवाई वहां से हुई। वहां पंजीकृत फर्म पर कार्रवाई के बाद कडिय़ां जोड़ते हुए रायगढ़ के आवेश अग्रवाल को पकड़ा गया। ओडिशा की कंपनियों से ही पूरा काम किया गया इसीलिए राउरकेला में कार्रवाई चल रही है।
बरमकेला के फर्म श्याम रोडलाइंस पर पड़ा था छापा
अगस्त महीने में स्टेट जीएसटी की टीम ने बरमकेला के शुभम की फर्म श्याम रोडलाइंस पर छापा मारा था, लेकिन कोई गड़बड़ी नहीं पकड़ी गई। इसके बाद सेंट्रल जीएसटी ने कार्रवाई की तो आवेश का लिंक शुभम से भी जुड़ा मिला। बताया जा रहा है कि उसने भी कई फर्जी फर्म बनाकर लेन-देन किया है। आने वाले दिनों में डीजीजीआई शुभम को भी तलब कर सकती है।
आवेश अग्रवाल पिता स्व. अशोकअग्रवाल कोतरा रोड रायगढ़ का निवासी है, जबकि अमन सिंघानिया पिता अजय सिंघानिया ढिमरापुर रोड कृष्णा विहार में रहता है।
साकेत अग्रवाल सरिया का निवासी है वहीं शुभम अग्रवाल उड़ीसा का निवासी है।


