रायगढ़। सारंगढ़ में प्रस्तावित जिंदल के ग्रीन सस्टेनेबल लाइमस्टोन खदान परियोजना को लेकर ग्रामीणों और जनसंगठनों का क्रोध लगातार उबाल पर है। ग्राम धौंराभाठा, जोगनीपाली, कपिस्दा, लालाधुरवा और सरसरा सहित पूरे प्रभावित क्षेत्र में यह खदान किसान युवाओं महिलाओं और सामाजिक संगठनों के बीच व्यापक आक्रोश का कारण बन चुकी है।
268 करोड़ रुपये की इस परियोजना के लिए जिंदल समूह जिस विशाल कृषि भूमि को निगलने की तैयारी में है वह पीढ़ियों से इन गांवों की जीवनरेखा रही है। ग्रामीणों का साफ आरोप है रायगढ़ को बर्बाद करने के बाद अब सारंगढ़ को भी उद्योगों की राख में बदलने की साजिश चल रही है। 24 सितंबर 2025 को आयोजित पिछली जनसुनवाई ग्रामीणों के जबरदस्त विरोध नारेबाज़ी और हजारों की संख्या में भीड़ के दबाव के चलते स्थगित करनी पड़ी थी लेकिन अब प्रशासन ने 17 नवंबर 2025 को पुनः जनसुनवाई आयोजित करने की घोषणा कर दी है जिसे ग्रामीण, कॉरपोरेट दबाव में लिया गया निर्णय बता रहे हैं।
कृषि भूमि पर सीधा हमला
यह खदान हजारों किसानों की उपजाऊ ज़मीन को हमेशा के लिए बंजर बना देगी। भूजल सूख जाएगा कुएँ-नलकूप ध्वस्त हो जाएंगे और खेती असंभव हो जाएगी। ग्रामीणों का आरोप है कि जिंदल समूह ने रायगढ़ क्षेत्र में पहले भी बिना पुनर्वास प्रक्रिया के कई गांवों को उजाड़ा, हजारों लोगों की स्वास्थ्य स्थिति बिगाड़ी और पर्यावरण को जहरीले स्तर तक पहुँचाया लाइमस्टोन खनन के कारण धूल, कंपन और रासायनिक प्रभाव से क्षेत्र की हवाएँ जहरीली होंगी, पशुधन फसलें और पेयजल सभी प्रभावित होंगे। ग्रामसभा की अनुमति लिए बिना परियोजना आगे बढ़ाना संविधान के 73वें संशोधन का खुला उल्लंघन है।
ग्रामीणों, युवाओं, किसान संगठनों, महिला समूहों और छात्र संगठनों ने साफ घोषणा की है कि वे 17 नवंबर की जनसुनवाई को हर हाल में रोकने मैदान में उतरेंगे।



