रायगढ़। दो सहकारी समितियों को भेजे जाने वाले खाद को चोरी कर बाजार में बेच दिया गया। अब इसकी वसूली के लिए मार्कफेड और अपेक्स बैंक ने वसूली का आदेश जारी किया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर संग्रहण केंद्र प्रभारी से 11 लाख रुपए और दोनों तत्कालीन समिति प्रबंधकों से करीब साढ़े 4 लाख रुपए वसूलने का आदेश दिया गया है।
मार्कफेड, कृषि विभाग और अपेक्स बैंक किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए जवाबदेह हैं। भंडारण और परिवहन की जिम्मेदारी मार्कफेड पर होती है। इस तरह से ये तीनों इकाइयां ही उर्वरकों की समय पर आपूर्ति के लिए जिम्मेदार होते हैं। खाद की भारी किल्लत के बीच किसानों के हिस्से का खाद खुले बाजार में बेचा जा रहा है। ऐसा करने वाले की पहचान को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है।
मार्कफेड के घरघोड़ा संग्रहण केंद्र में भारी गड़बड़ी की गई है। खरीफ वर्ष 2024 में टेंडा नवापारा समिति को भेजा गया 25 एमटी डीएपी और 25.20 एमटी यूरिया का पता नहीं चल सका है। लिबरा समिति में भी 30 एमटी डीएपी नहीं पहुंचा। इसकी जांच कलेक्टर द्वारा गठित कमेटी कर रही थी जिसकी रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक खाद की कुल कीमत 15,58,699 रुपए में से पूर्व प्रभारी घरघोड़ा संग्रहण केंद्र वर्तमान लिबरा में 7,17,660 रुपए और टेंडा नवापारा में करीब 3,80,649 रुपए वसूली की जाएगी। इसके अलावा लिबरा के पूर्व प्रबंधक रुपेंद्र पटेल से 79,740 रुपए और टेंडा नवापारा के पूर्व प्रबंधक पुन्नू राम राठिया से 3,80,649 रुपए वसूली की जाएगी। तीनों को राशि जल्द जमा करने को कहा गया है।
खाद चोरी करने वालों की पहचान छिपा रहे अधिकारी
किसानों को खाद मिल नहीं रही है और संग्रहण केंद्र से खाद बाहर बेच दिया जा रहा है। जांच कमेटी ने इस मामले में वसूली की अनुशंसा कर दी है लेकिन खाद कहां गया, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। 55 टन डीएपी और 25 टन यूरिया को कहां बेचा गया, इसका कोई प्रमाण ही नहीं ढूंढ़ पाए। घरघोड़ा संग्रहण केंद्र में बारदाने का हिसाब भी गड़बड़ है। मार्कफेड के संरक्षण में संग्रहण केंद्र में गड़बड़ी हो रही है। 80 टन उर्वरक चोरी किया गया है। यह मामला पूरी तरह आपराधिक है। इसमें एफआईआर दर्ज करवाई जानी थी लेकिन अभी तक मामले को दबाए रखा गया है।



