रायगढ़। भाजपा भले ही रायगढ़ जिले की धरमजयगढ़ और लैलूंगा विधानसभा सीटों पर सांसदों को उतारने की रणनीति पर काम कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत पार्टी की इस योजना पर भारी पड़ती दिख रही है। दोनों ही सांसदों की निष्क्रियता अब उनके विधानसभा चुनाव लड़ने के रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा बन गई है।
चर्चा में हैं धरमजयगढ़ से लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया और लैलूंगा से राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह। पार्टी सूत्रों के अनुसार संगठन दोनों नामों पर गंभीरता से विचार कर रहा है, पर अब तक के कार्यकाल का लेखा-जोखा दोनों के पक्ष में नहीं जाता।
स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं में सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर है कि दोनों सांसदों ने अब तक रायगढ़ मुख्यालय में अपना स्थायी कार्यालय और आवास तक नहीं खोला है। सांसद बनने के बाद जनता से सीधा संवाद का कोई माध्यम नहीं बन सका।
उपलब्धि के नाम पर सन्नाटा
दोनों सांसदों के कार्यकाल में जिले के लिए कोई बड़ी उपलब्धि, कोई बड़ा प्रोजेक्ट या केन्द्रीय योजना को लाने का दावा भी जमीनी स्तर पर नहीं दिखता। क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर जनता में जबरदस्त आक्रोश देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिन सीटों पर भाजपा को मजबूत चेहरे की जरूरत है, वहां निष्क्रिय चेहरे उतारने से पार्टी को फायदे की जगह नुकसान की संभावना ज्यादा है। आदिवासी बहुल इन दोनों सीटों पर कांग्रेस पहले से मजबूत स्थिति में है, ऐसे में जनता के बीच पकड़ न रखने वाले प्रत्याशी से चुनावी समीकरण बिगड़ सकता है।
फिलहाल संगठन स्तर पर नामों पर मंथन जारी है, लेकिन जमीनी कार्यकर्ताओं की राय है कि पार्टी को इस फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए।

