रायगढ़। जल की उपयोगिता के लिए और उसके रखरखाव के लिए योजनाओं को अमल में लाती है और इसके तहत पुराने तालाब, टॉरों और जलाशय के जीर्णोद्धार, सुधार, मेंटेनेंस और उन्ननियकरण करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च करते हैं पर भ्रष्ट हाथों से उम्मीद करके धोखा ही मिलता है।
कुछ ऐसे हुआ रायगढ़ विधानसभा के रायगढ़ और पुसौर ब्लॉक के तहत सिंचाई विभाग के कार्यों में आबंटित लगभग 15 करोड रुपए की राशि में बेहतरीन षड्यंत्र और अफरातफरी करके खुलेआम भ्रष्टाचार किया गया जिसमें त्वरित जांच की मांग की गई।
रायगढ़ बचाओ-लड़ेंगे रायगढ़ के विनय शुक्ला,जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा के वासुदेव शर्मा, जन चेतना मंच के राजेश त्रिपाठी, अभिषेक चौहान, शिवम कच्छवाहा, अमन तलरेजा, सुरेंद्र पटेल, सुबल गुप्ता, संतोष राणा, वीरेंद्र गुप्ता, बंशीधर प्रधान, नरोत्तम चौहान, सत्यानंद चौहान, योगेंद्र निषाद, तुलाराम भोई, शशिधर पंडा, गोवर्धन मांझी, अनिल चीकू आदि ने बताया की रायगढ़ विधानसभा के अंतर्गत रायगढ़ ब्लॉक के कोयलंगा डायवर्सन के लिए दो करोड़ 5 लाख, बेलरिया स्टॉप डैम और एनिकट केलिए 5 करोड़ 21 लाख लगभग और पुसौर ब्लॉक के बड़े हरदी तालाब के लिए एक करोड़ 5 लाख, सिहा जलाशय के लिए लगभग 1 करोड़, मंशाटार के लिए एक करोड़, बाघाडोला जलाशय के लिए एक करोड़ 5 लाख रुपए और बासनपाली तालाब के लिए एक करोड़ 5 लाख रुपए शासन के द्वारा आवंटित किया गया जिसमें इनका तालाबो, जलाशयों और टारों आदि के जीर्णोद्धार,सुधार,मेंटेनेंस और उन्ननियकरण के लिए लगभग कुल मिलाकर 15 करोड रुपए शासन से मिला था का टेंडर भी हुआ और ठेकेदारों को सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अधीनस्थ टेंडर के बताए योजना के अनुसार और निर्धारित सामग्रियों के साथ बेहतर कार्य करना था पर उपरोक्त स्थान का अवलोकन करने के साथ गांव के नागरिकों की शिकायत के अनुसार स्थल का अवलोकन किया गया जिसमें भारीभरकम रूप से घटिया निर्माण किया गया और शिकायतें होने पर अधिकारियों की बड़ी पहुंच के कारण जांच को रुकवा कर रखा गया जिसमें कोयलांगा डायवर्सन के अंतर्गत निर्मित की गई नहरे धँस गई और फटी हुई है इसके स्टॉप डैम के रिपेयरिंग में भी थूक पॉलिस की गई और पुराने नहर को साफ-सफाई के नाम से केवल फर्जी भुगतान निकलने का षडयंत्र हो रहा। बेलरिया स्टॉप डैम की शिकायत तो गांव वालों ने जनदर्शन में श्रीमान कलेक्टर महोदय, रायगढ़ के सामने 27 अप्रैल 2026 कोई कर दिया था इस शिकायत में जांच क्यों रुकी हुई है यह समझ से परे है।पुसौर ब्लॉक के अंतर्गत पुसौर बस्ती के अंतिम छोर में इस टार के कार्यों को देख कर सभी हतप्रभ हो जाएंगे कि इसमें हुई पिचिंग और ढलाई के कार्यों के कई दिनों बाद उसे छुआ गया तो वह वहां से उखड़ने लगी विभाग के प्लान के अनुसार हुई ढलाई माप से कम ही थी।बड़े हरदी तालाब में ठेकेदार के द्वारा सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मिली भगत से घटिया सीमेंट से चार खुटिया पत्थर निर्मित करके वहां लगाया गया जिसे छूने से ही वह झरने लगा और साथ ही साथ पुराने निकासी द्वार का घटिया निर्माण खुलेआम दिखता है जो की भ्रष्टाचार का अनुपम उदाहरण है। बाघाडोला जलाशय में तो सीमेंट के घोल की मोटी पुताई के साथ घटिया सामग्री का निर्माण में उपयोग और पानी निकासी का दरवाजा जांच योग्य है। बासनपाली जलाशय के खुलेआम ऊबड़-खाबड़ ढलाई उसमें भी हल्की सामग्री के उपयोग किया गया,इस ढलाई में जांच की बात यह भी है कि लकड़ी के पट्टों को चार खूंटी में बांध कर ढलाई कर दी गई जिसमें लोहे की छड़ भी नहीं लगाया गया और ढलाई के नीचे की मिट्टी के लिए लेबलिंग भी करना उचित नहीं समझा गया । रायगढ़ सिंचाई विभाग के अंतर्गत हुय उपरोक्त सभी कार्यों की बशर्ते बरसात से पूर्व करवाने की शिकायत की गई।
रायगढ़ बचाओ-लड़ेंगे रायगढ़ के विनय शुक्ला,जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा के वासुदेव शर्मा,जन चेतना मंच के राजेश त्रिपाठी,अभिषेक चौहान, शिवम कच्छवाहा,अमन तलरेजा,सुरेंद्र पटेल,सुबल गुप्ता,संतोष राणा,वीरेंद्र गुप्ता, बंशीधर प्रधान,नरोत्तम चौहान,सत्यानंद चौहान,योगेंद्र निषाद,तुलाराम भोई,शशिधर पंडा,गोवर्धन मांझी,अनिल चीकू
आदि ने अपना शिकायत पत्र रायगढ़ के युवा कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी को सौंपा और आग्रह किया कि रायगढ़ विधानसभा में लगभग 15 करोड़ के कार्यों की स्वीकृति कार्यपालन यंत्री सिंचाई विभाग, रायगढ़ के अंतर्गत हुई है जिसमें खुले आम घटिया निर्माण और घटिया सामग्रियों का उपयोग विभाग के अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से हुआ है और इसमें बरसात से पूर्व जांच होने पर यह पता चलेगा कि कितना भ्रष्टाचार हुआ है जैसे कि “”आटे में नमक मिलाया गया कि नमक में आटा मिलाया गया””यह पता जब चलेगा जब जांच बरसात पूर्व होगी और ठोस कार्यवाही होने पर भ्रष्ट्रचारी पकड़े जा सकेंगे।

