रायगढ़, 12 फरवरी 2026/ जिले में टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “फसल बदलो, जीवन बदलो” कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। छत्तीसगढ़ शासन के सहयोग से संचालित यह पहल राज्य के नौ जिलों में लागू की जा रही है। कार्यक्रम का उद्देश्य कम पानी में उगने वाली एवं अधिक पोषण देने वाली फसलों को बढ़ावा देना, धान पर अत्यधिक निर्भरता कम करना तथा जलवायु अनुकूल कृषि प्रणाली विकसित करना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि यह एक सामुदायिक आधारित पहल है, जिसमें महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि खरीफ में धान उत्पादन के बाद अब बहुफसली खेती की ओर बढ़ना आवश्यक है। विभिन्न प्रकार के अनाज, दालें, तिलहन, सब्जियां और मसालों की खेती से परिवार के पोषण स्तर में सुधार तथा किसानों की आय में वृद्धि संभव है। उन्होंने कहा कि केवल धान पर निर्भर रहने से परिवार की पोषण आवश्यकताएं पूरी नहीं हो सकतीं। फसल विविधीकरण से बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।
डॉ. हर्षा वशिष्ठ ने बताया कि कृषि बजट का लगभग 30 प्रतिशत भाग धान प्रोत्साहन पर व्यय होता है। उन्होंने कहा कि धान पर अत्यधिक निर्भरता का प्रभाव जल संसाधनों, मिट्टी की उर्वरता और मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसलिए कम पानी में उगने वाली तथा अधिक पोषण देने वाली फसलों को अपनाना आवश्यक है। उप संचालक कृषि श्री अनिल वर्मा, बीज प्रमाणीकरण के प्रबंध निदेशक श्री अजय अग्रवाल तथा बीज निगम के महाप्रबंधक श्री विनोद वर्मा सहित अन्य अधिकारियों ने किसानों को विविध कृषि गतिविधियों से जुड़ने का आह्वान किया। अधिकारियों ने मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों को अपनाकर आय के स्रोतों में विविधता लाने की सलाह दी। गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और न्यूनतम समर्थन मूल्य के माध्यम से आय वृद्धि की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए महिलाओं को जैविक किसान एवं बीज उत्पादक के रूप में पंजीयन कराने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में किसानों ने अपने अनुभव साझा किए। रायगढ़ के किसान प्रमोद साहू ने टपक सिंचाई और सब्जी उत्पादन के महत्व पर बल दिया। लैलूंगा की पुरस्कार प्राप्त महिला किसान गायत्री पैंकरा ने एकीकृत खेती से स्थिर एवं विविध आय प्राप्त होने की जानकारी दी। कार्यक्रम के अंत में किसानों को बीज वितरित किए गए और फसल विविधीकरण अपनाकर समृद्ध एवं टिकाऊ कृषि भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया गया। इस अवसर पर बीएलएफ, प्रदान संगठन के सदस्यगण और बड़ी संख्या में कृषणगण मौजूद रहे।



